प्रकाश सुग्राहीकारक:-
कुछ प्रकाश रसायनिक अभिक्रियाओं में अभिकारक सीधे ही प्रकाश का अवशोषण नहीं कर सकते किंतु यदि अभिकारक में कोई ऐसा बाहरी पदार्थ मिला दिया जाए जो प्रकाश का अवशोषण कर ले किंतु क्रिया में भाग न ले तथा अवशोषित ऊर्जा को अभिकारक को स्थानांतरित कर दे जिससे अभिकारक के अणु प्रकाश रासायनिक अभिक्रिया में भाग ले सकें तो ऐसी अभिक्रियाएं प्रकाश सुग्राही(photo sensitized) अभिक्रियाएं तथा यह घटना प्रकाश सुग्राहीकरण ( photo sensitization) कहलाती है। प्रकाश अवशोषित करने वाला पदार्थ प्रकाश सुग्राहीकारक(photo sensitizer) कहलाता है।
उदाहरण:- (1) यदि H2 अणु को 2537A° वाली विकिरणों से प्रकार प्रकाशित किया जाए तो उसका वियोजन नहीं होता है किंतु Hg वाष्प की उपस्थिति में इन्हीं विकिरणों द्वारा वियोजन हो जाता है। Hg परमाणु फोटाॅन का अवशोषण कर उत्तेजित परमाणु बन जाता है।
Hg + hv -------> Hg*
Hg* हाइड्रोजन अणु से टकराकर अवशोषित ऊर्जा H2 को दे देता है। इससे H2 अणु का वियोजन हो जाता है। अतः इस प्रकाश रसायनिक अभिक्रिया में Hg वाष्प प्रकाश सुग्राहीकारक का कार्य करता है।
Hg + H2 ---------> H2* + Hg
H2* ---------> H + H
(2) पौधों में कार्बोहाइड्रेट का संश्लेषण एक अन्य महत्वपूर्ण उदाहरण है। पौधे सूर्य के प्रकाश की उपस्थिति में Co2 तथा H2O की अभिक्रिया से कार्बोहाइड्रेट बनाते हैं।
Co2 + H2O + hv ----------> 1/6(C6H12O6) + O2
यहां Co2 और H2O दोनों ही दृश्य प्रकाश का अवशोषण नहीं कर सकते किंतु जीवित पौधों में उपस्थित क्लोरोफिल दृश्य प्रकाश का अवशोषण करके Co2 और H2O अणुओं को ऊर्जा का स्थानांतरण कर देता है तथा कार्बोहाइड्रेट बनता है।
(3) जल वाष्प वियोजन--
Hg + hv ---2537A°---- > Hg*
Hg + H2O -----> Hg + H + OH
2OH ----------> H2O2
(4) ऑक्सीजन का ओजोनीकरण--
Hg + hv ----2537A°------> Hg*
Hg* + 3O2 -----------> 2O3 + Hg
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By Manjit sahu
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