ऊष्मागतिकी के तृतीय नियम की सहायता से ठोस क्रिस्टल पदार्थों में परम एंट्रॉपी का निर्धारण:-
ऊष्मागतिकी के द्वितीय नियम से स्थिर दाब पर एंट्रॉफी परिवर्तन के लिए व्यंजक है-
ऊष्मागतिकी के तृतीय नियम के अनुसार परम शून्य ताप ( T= 0 ) पर विशुद्ध क्रिस्टलीय पदार्थों की परम एण्ट्रॉपी शून्य (S=0) होती है।
समीकरण (1) का और T=T (ऐच्छिक ताप) के बीच समाकलन करने पर,
ST क्रिस्टलीय ठोस की T ताप पर परम एण्ट्रॉपी है। समीकरण (3) से स्पष्ट है कि यदि T=0 तथा T=T अर्थात् ऐच्छिक ताप के बीच विभिन्न तापों पर क्रिस्टलीय पदार्थों की ऊष्माधारिता ज्ञात हो तो परम एण्ट्रॉपी का मान ज्ञात किया जा सकता है।
समीकरण (3) का समाकलन प्राप्त करने के लिए विभिन्नता तापों पर पदार्थ की उष्माधारिता Cp का मापन किया जाता है तत्पश्चात Cp तथा ln T के मध्य ग्राफ खींचा जाता है।इस प्रकार प्राप्त वक्र के नीचे वाला क्षेत्रफल ABC क्रिस्टलीय पदार्थ की T ताप पर परम एण्ट्रॉपी ST होती है। यह क्षेत्रफल छायित भाग द्वारा दर्शाया गया है।
परम शून्य पर Cp का मापन संभव नहीं है। अतः Cp का मापन ऐच्छिक ताप (T) से कम से कम ताप (10 से 15k) जहां तक संभव हो ज्ञात करते हैं फिर केवल मापे गए Cp के मानों तथा ln T के मध्य ग्राफ खींचते हैं। 10 से 15k से कम ताप पर Cp ज्ञात करने के लिए वक्र का बिंदु B से A तक बहिर्वेशन करते हैं। इस प्रकार बहिर्वेशन से 10 से 15k से कम ताप पर भी Cp का मान ज्ञात हो जाता है।
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By Manjit sahu




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