बुधवार, 3 जून 2020

ऊष्मागतिकी का तृतीय नियम


परिचय:-
नर्नस्ट ऊष्मा प्रमेय के अनुसार परम शून्य पर अभिकारकों तथा क्रियाफलों की ठोस अवस्था में एण्ट्रॉपी का अंतर शून्य हो जाता है। इसका अर्थ यह है कि परम शून्य ताप पर ठोस अवस्था में अभिकारकों तथा क्रियाफलों की एण्ट्रॉपियां एकसमान होती है। इस आधार पर प्लांक ने कहा कि शुद्ध ठोसों की एण्ट्रॉपियां कम होते होते परम शून्य ताप पर शून्य हो जाती है। इस आधार पर,

                      lim S = 0
                      T--->0

 ऊष्मागतिकी का तृतीय नियम:- परम शून्य ताप पर सभी विशुद्ध क्रिस्टलीय ठोस पदार्थों की एण्ट्रॉपी शून्य हो जाती है।

स्पष्टीकरण:- क्रिस्टलीय ठोस में क्रिस्टल नियमित रूप से व्यवस्थित रहते हैं तथा परम शून्य ताप पर अनियमितता शून्य होती है। अतः शुद्ध क्रिस्टलीय पदार्थों की परम शून्य ताप पर एण्ट्रॉपी शून्य होती है।

 उपयोगिता:- इस नियम की सहायता से शुद्ध क्रिस्टलीय पदार्थों की परम एण्ट्रॉपी की गणना की जा सकती है।

इस लिंक पर जाए 👇👇👇
https://youtu.be/Zit3uLYGztQ

By Manjit sahu

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