सोमवार, 8 जून 2020

द्विध्रुव आघूर्ण


द्विध्रुव आघूर्ण:-
जब किसी अणु में दो विभिन्न तत्वों के परमाणु रहते हैं, जैसे- हाइड्रोजन तथा क्लोरीन तो बंध में उपस्थित इलेक्ट्रॉन एक परमाणु की अपेक्षा दूसरे की ओर अधिक आकर्षित रहते हैं, जैसे-HCl में इलेक्ट्राॅन हाइड्रोजन की अपेक्षा क्लोरीन की ओर अधिक आकर्षित रहते हैं जिससे क्लोरीन पर कुछ ऋणात्मक आवेश तथा हाइड्रोजन पर समान धनात्मक आवेश उत्पन्न हो जाता है। अतः HCl के अणु को एक आण्विक द्विध्रुव H+➖Cl- के रूप में दर्शा सकते हैं। 

परिभाषा एक द्विध्रुव अणु में धनात्मक या ऋणात्मक केंद्र पर विद्युत आवेश e तथा उनके मध्य दूरी d का गुणनफल द्विध्रुव आघूर्ण कहलाता है।

 यदि एक इकाई धन आवेश एक इलेक्ट्रॉन से 1 A° दूरी पर स्थित हो, तो द्विध्रुcव आघूर्ण
 =(4.8×10power of -10 e.s.u.)×(10power of -8 cm)
 =4.8×10power of -18 e.s.u.cm
 =4.8डिबाई(1 डिबाई=10power of -18 e.s.u.)

वाष्प ताप विधि(vapour temperature method):-
द्विध्रुव आघूर्ण ज्ञात करने के लिए विभिन्न तापों पर पदार्थ का परावैद्युत अंक D तथा घनत्व p(रो) ज्ञात करना लेते हैं। D,M और p(रो) के मान रखकर प्रत्येक ताप पर Pt का मान ज्ञात कर लेते हैं। अब P तथा 1/T के बीच एक ग्राफ खींचते हैं। सरल रेखा के ढाल का मान B के बराबर होता है। B की गणना निम्न प्रकार से करते हैं--

माना CH3CL के लिए प्राप्त सरल रेखा पर दो बिंदु x1 व x2 लिए जिनके नियतांक क्रमशः (P1,1/T1) व (P2,1/T2) हैं।

 तब x1 के लिए P1=A+B/T1 व P2=A+B/T2

.°. P1-P2=B(1/T-1/T2)

.•. B=(P1-P2)/(1/T1-1/T2)

अब


 समीकरण में B का मान रखकर द्विध्रुव आघूर्ण का मान प्राप्त कर लेते हैं।

 द्विध्रुव आघूर्ण तथा आण्विक संरचना:-द्विध्रुव आघूर्ण का मान ज्ञात करने होने पर अणु की संरचना के संबंध में महत्वपूर्ण जानकारी प्राप्त होती है। संरचना संबंधी जानकारी प्राप्त होने के कुछ उदाहरण निम्नवत् हैं--

(१) एक परमाणु गैसों ( जैसे- हिलियम, आर्गन आदि) का द्विध्रुव आघूर्ण शून्य होता है।

(२) द्विपरमाणुक अणुओं में विद्युत ऋणात्मक समान होने पर द्विध्रुव आघूर्ण शून्य होता है। परंतु HCl,HBr आदि अणुओं  का द्विध्रुव आघूर्ण शून्य से अधिक होता है।

(३)CO2,CS2 आदि त्रिपरमाणुक अणु संयमित या असममित हो सकते हैं। CO2,CS2 आदि का द्विध्रुव आघूर्ण शून्य होता है तथा इनके अणु रेखीय होते हैं।
       O=C=O                 S=C=S
कार्बन डाइऑक्साइड  कार्बन डाईसल्फाइड

(४) जल के अणु के लिए द्विध्रुव आघूर्ण 1.84D है तथा इसका बंध कोण 105•6' है यह 'V' आकार का होता है। इसी प्रकार H2S,SO2 आदि का द्विध्रुव आघूर्ण, कोणीय संरचना होने के कारण शून्य से अधिक होता है।

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https://youtu.be/rau_wlEyYYY

By Manjit sahu

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