ध्रुवण घूर्णकता(optical activity):-
ध्रुवण घूर्णकता पूर्णतः संघटनात्मक/संरचनात्मक गुण है। साधारण प्रकाश में अनुप्रस्थ तरंग गति होती है जिसमें प्रकाश के संचरण की दिशा के लंबरूप किसी भी तल में दोलन हो सकते हैं। यदि किसी प्रकार से ऐसा प्रकाश प्राप्त किया जाए जिसमें सभी दोलन एक ही तल में हो तो ऐसा प्रकाश समतल ध्रुवित प्रकाश कहलाता है तथा उसके तल को ध्रुवण तल कहते हैं। ऐसे समतल ध्रुवित प्रकाश के किरण पुंज को यदि किसी ऐसे द्रव या ठोस के विलयन में प्रवाहित किया जाए जिससे प्रकाश का ध्रुवण तल घूम जाए तो इस गुण को ध्रुवण घूर्णकता कहते हैं तथा वे पदार्थ जो ध्रुवण तल को घुमाते हैं ध्रुवण घूर्णक पदार्थ कहलाते हैं। वे पदार्थ जो प्रकाश के घूर्णन तल को दक्षिणावर्त दिशा में घुमाते हैं दक्षिण ध्रुवण घूर्णक तथा जो वामावर्त दिशा में घुमाते वाम घूर्णक कहलाते हैं। ध्रुवण घूर्णकता का गुण केवल उन्हीं पदार्थों में पाया जाता है जिनके अणुओं में असममित कार्बन परमाणु होता है।
ध्रुवण तल जितने अंश घूमता है उसे घूर्णन का कोण कहते हैं।
यदि सोडियम प्रकाश को D रेखा के तरंगदैर्ध्य को लेमडा D से दर्शायें तो t °C पर किसी द्रव या विलियन के अपेक्षिक घूर्णन को निम्न समीकरण द्वारा व्यक्त करते हैं--
यदि पदार्थ का विलियन लिया जाए तो घनत्व के स्थान पर सांद्रता प्रति घन सेंटीमीटर लिया जाता है।
अतः समतल ध्रुवित प्रकाश को 1 डेसीमीटर लंबाई तथा 1 ग्राम प्रति मिलीलीटर सांद्रता वाले विलियन से गुजारने पर समतल ध्रुवित प्रकाश का तल जितने डिग्री से घूम जाता है वह उस विलियन के घुले हुए पदार्थ का आपेक्षिक घूर्णन कहलाता है।
घूर्णन विलियन में उपस्थित पदार्थ की सांद्रता पर निर्भर होता है। यदि m ग्राम पदार्थ 100ml विलायक में विलेय हो, तो
अपेक्षित घूर्णन को अणुभार से गुणा करने पर आण्विक घूर्णक प्राप्त होता है ।
आण्विक घूर्णन
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https://youtu.be/ZpWJy-Mgr1I
By Manjit sahu






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