प्रति चुंबकीय व्यवहार की व्याख्या:-
इलेक्ट्रॉन एक आवेशित कण है जिसके चक्रण से चुंबकीय क्षेत्र उत्पन्न होता है। किसी परमाणु या अणु के भरे हुए आर्बिटल में यदि विपरीत चक्रण वाले दो अयुग्मित इलेक्ट्रान है तो उस उनके चुंबकीय आघूर्ण एक दूसरे को नष्ट या निरस्त कर देते हैं। अतः ऐसे पदार्थ जिनमें युग्मित इलेक्ट्रॉन या पूर्णतः भरे हुए आर्बिटल होते हैं, उनके परिणामी चुंबकीय आघूर्ण शून्य होते हैं। अधिकांश अणुओं में सम संख्या में इलेक्ट्रॉन होते हैं इसलिए अधिकांश अणुओं के परिणामी चुंबकीय आघूर्ण शून्य होते हैं। अतः वे अणु जिनमें विपरीत चक्रण वाले युग्मित इलेक्ट्रॉन होते हैं प्रति चुंबकीय व्यवहार दर्शाते हैं। जब इलेक्ट्रॉन पूर्ण पूरित में होते हैं तो उनका परिणामी आघूर्ण शून्य होता है किंतु बाह्य चुंबकीय क्षेत्र लगाने पर उनके आघूर्ण में परिवर्तन हो जाता है जिससे प्रति चुंबकत्व उत्पन्न होता है।
अनु चुंबकीय व्यवहार:- परमाणु, अणु अथवा आयन जिनमें एक या अधिक अयुग्मित या विषम इलेक्ट्रॉनों वाली आर्बिटल होते हैं उनके चुंबकीय आघूर्ण एक दूसरे से निरस्त नहीं होते हैं। अतः ऐसे पदार्थों में स्थायी चुंबकीय आघूर्ण होता है। ये पदार्थ अनु चुंबकीय कहलाते हैं।
अणु के नाभिक लड्डू के समान अपने अक्ष पर चक्रण करते रहते हैं अतः इलेक्ट्रॉनों के चक्रण कोणीय संवेग की भांति नाभिकों के भी चक्रण कोणीय संवेग होते हैं जिसके कारण उनका भी चुंबकीय आघूर्ण होता है। नाभिकों के चक्रण कोड़ी संवेग के कारण भी पदार्थ में अनुचुंबकीय प्रभाव उत्पन्न होता है अतः इनसे उत्पन्न अनुचुंबकत्व अयुग्मित इलेक्ट्रॉनों के कारण उत्पन्न अनुचुंबकीय प्रभाव की तुलना में नगण्य होता है।
बहुत से पदार्थों में इलेक्ट्राॅन आर्बिटल गति तथा इलेक्ट्राॅन चक्रण का चुंबकीय आघूर्ण भरे हुए आर्बिटलों में अयुग्मित इलेक्ट्रॉन होने के कारण निरस्त हो जाता है। बहुत से दुर्लभ मृदा तथा संक्रमण तत्वों में अयुग्मित इलेक्ट्रॉन होने के कारण वे अनुचुंबकीय होते हैं। ऑक्सीजन अणु में दो अयुग्मित इलेक्ट्राॅन होने के कारण यह अनुचुंबकीय है। अनुचुंबकीय आयन या अणु का चुंबकीय आघूर्ण बोर मैग्नेट्रॉन में व्यक्त करते हैं।
e= इलेक्ट्रॉन का आवेश, m= इलेक्ट्रॉन का द्रव्यमान, c= प्रकाश का वेग
1B.M.=9.273×10की घात -21 अर्ग/गाॅस
लौह चुंबकत्व की व्याख्या आयरन(Fe) का इलेक्ट्रॉनिक विन्यास 1s2,2s2,2p6,3s2 है।
3p6 तथा उसके पहले के सभी उप ऊर्जा स्तर पूर्णतः भरे हुए हैं। Fe++ और Fe+++ आयनों के d आर्बिटल में इलेक्ट्रॉनों का वितरण निम्न प्रकार है--
Fe++=2,1,1,1,1 Fe+++=1,1,1,1,1
Fe++ में चार तथा Fe+++ में पांच अयुग्मित इलेक्ट्रॉन स्पिन हैं। ये स्पिन एक दूसरे से समांतर रूप में संरेखित रहते हैं। इसी संयुक्त संरेखण के कारण पदार्थ में प्रबल चुंबकत्व होता है। Fe,Co,Ni,Gd,Dy तथा उनके कुछ मिश्रधातु और यौगिक लौह चुंबकीय होते हैं।
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https://youtu.be/Lkvz2838SIc
By Manjit Sahu

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