जेबलाॅन्सकी आरेख:-
प्रत्येक अणु एक क्वांटम विकिरण का अवशोषण करके प्रकाश रासायनिक सक्रिय हो जाता है। सक्रियित अणु में प्रारंभिक प्रक्रमों का घटित होना जेबलोन्स्की आरेख द्वारा दर्शाया जा सकता है। स्फुरदीप्ति और प्रतिदीप्ति घटनाओं को भी जेबलोन्स्की आरेख द्वारा समझाया जा सकता है।
यदि अणु की किसी अवस्था में S कुल इलेक्ट्रॉन स्पिन को दर्शाता है तो (2s+1) उस अवस्था की स्पिन बहुलता(spin multiplicity) होगी। जब किसी आर्बिटल में स्पिन युग्मित(paired spin) होते हैं तब इलेक्ट्रान स्पिन का ऊपर की ओर अभिविन्यास नीचे की ओर अभिविन्यास से निरस्त हो जाता है जिससे अणु का कुल इलेक्ट्राॅन स्पिन S=0 हो जाएगा।
S1=+1/2 और S2=-1/2
S1+S2=+1/2-1/2=0
स्पिन बहुलता 2S+1=2×0+1=1
इस स्थिति को इस प्रकार कहा जा सकता है कि अणु अपनी एकक मूल अवस्था(singlet ground state) में है जैसा ऊपर के चित्र में दर्शाया गया हैं।
जब मूल अवस्था में उपयुक्त विकिरण के फोटॉन के अवशोषण से युग्मित इलेक्ट्रॉनों से एक इलेक्ट्रॉन प्रथम उत्तेजित इलेक्ट्रॉनिक अवस्था में पहुंच जाता है तो मूल अवस्था तथा उत्तेजित अवस्था में दोनों इलेक्ट्रॉनों के स्पिन अभिविन्यास समदिश या प्रति समानांतर ( anti parallel) हो सकते हैं जैसा नीचे के चित्रों में दर्शाया गया है।
समदिश/ समानांतर स्पिन--
S1=+1/2 और S2=+1/2
S1+S2=+1/2+1/2
(2S+1)=2×1+1=3
अतः अणु की स्पिन बहुलता 3 है तथा अणु अपनी त्रिक उत्तजित अवस्था(Triplet excited state) में है।
प्रति समानांतर स्पिन:-
S1=+1/2 और S2=-1/2
S1+S2=+1/2-1/2=0
(2S+1)=2×0+1=1
अणु की स्पिन बहुलता एक है अर्थात् अणु एकक उत्तेजित अवस्था(singlet excited state) में है।
द्विपरमाण्विक अणु ऊर्जा की उपयुक्त मात्रा का अवशोषण करके किसी भी उच्च इलेक्ट्रॉनिक अवस्था में जा सकता है। अतः अणु की कई एकक उत्तेजित अवस्थाएं हो सकती है। इन्हें प्रथम, द्वितीय, तृतीय आदि एकक अवस्थाएं कहते हैं तथा S1,S2,S3...... आदि से दर्शाते है। इसी प्रकार अणु की कई तरीका अवस्थाएं होती है जिन्हें T1,T2,T3..... आदि से दर्शाते हैं। त्रिक अवस्था में ऊर्जा एकक अवस्था से कम होती है। अर्थात् Es1>Et1,Es2>Et2,Es3>Et3 आदि ।
उपयुक्त विकिरण के फोटॉन के अवशोषण से अणु के इलेक्ट्रॉन का संक्रमण एकक मूल अवस्था S0 से S1,S2,S3 आदि पर हो सकता है। प्रत्येक संक्रमण के लिए प्रकाश ऊर्जा की एक निश्चित मात्रा का अवशोषण होता है। एकक उत्तेजित अवस्थाओं (S1,S2,S3 आदि) के नीचे इनकी संगत त्रिक उत्तेजित अवस्थाएं (T1,T2,T3 आदि) होती है। इस चित्र में प्राथमिक प्रक्रम में सक्रिय अणु का बनना तथा उसमें होने वाली प्राथमिक घटनाओं को दर्शाया गया है। अणु एकक उत्तेजित अवस्था या त्रिक उत्तेजित अवस्था में (दोनों स्थितियों में) सक्रियित अणु कहलाता है।
अणु की अपनी मूल अवस्था से उत्तेजित होकर उच्च ऊर्जा अवस्थाओं (S3,S2 या T3,T2) पहुंचने पर प्रकाश रसायनिक अभिक्रिया होने या कोई प्रतिदीप्ति उत्पन्न करने के पहले ही एक के बाद एक तीव्र गति से कुछ घटनाएं हो सकती है जिनमें अणु अपनी अतिरिक्त ऊर्जा खो देता है। इन घटनाओं को विकिरण रहित या अविकिरणात्मक संक्रमण कहते हैं।
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https://youtu.be/Ls72oX3KsZE
By Manjit sahu




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