रविवार, 31 मई 2020

क्वांटम दक्षता


क्वांटम दक्षता:-
क्वांटम दक्षता द्वारा अवशोषित प्रकाश के प्रत्येक क्वांटम द्वारा अपघटित होने वाले अणुओं का बोध होता है। इसे 'फाई' से प्रदर्शित किया जाता है।

 क्वांटम दक्षता(फाई)= दिए गए समय में अपघटित अणुओं की संख्या / उसी समय में अवशोषित क्वांटमों की संख्या

फाई= दिये गए समय में अपघटित मोलों की संख्या / उसी समय में अवशोषित आइंस्टीनों की संख्या
उच्च तथा निम्न क्वांटम दक्षता के कारण:-
उच्च तथा निम्न क्वांटम दक्षता का स्पष्टीकरण बोडेन्स्टाइन ने दिया। इसके अनुसार प्रकाश रासायनिक अभिक्रियाएं दो विभिन्न प्रक्रमोों में पूर्ण होती हैं--
(१)प्राथमिक प्रकम, (२)द्वितीयक प्रक्रम।
(१) प्राथमिक प्रक्रम:- इस प्रक्रम में पदार्थ का प्रत्येक अणु या परमाणु एक फोटॉन विकिरण अवशोषित कर उत्तेजित अणु या परमाणु बन जाता है--
        A   +    hv  ---->  A*   ---->  उत्पाद    
    परमाणु    क्वांटम   उत्तेजित अणु
    या अणु                  या  परमाणु

दूसरी संभावना यह है कि उत्तेजित अणु अपघटित होकर उत्पाद बना देता है। इन दोनों ही संभावनाओं में फाई का मान अवश्य एक रहता है।

(२) द्वितीयक प्रक्रम:- यह प्रक्रम प्राथमिक प्रक्रम से बने उत्तेजित परमाणुओं, अणुओं तथा मुक्त मूलकों से संबंधित है।
उच्च क्वांटम दक्षता के निम्नलिखित कारण है--
(१) प्राथमिक प्रक्रम में बने मूलक श्रृंखला अभिक्रिया आरंभ करते हैं, अतः ऐसी स्थिति में  फाई का मान श्रृंखला अभिक्रिया के परिमाण पर निर्भर करता है।
(२) माध्यमिक उत्पाद बन सकता है जो उत्प्रेरक का कार्य करता है।
(३) अभिक्रिया ऊष्माक्षेपी हो सकती है जिससे उत्सर्जित ऊष्मा अन्य अणुओं को सक्रियित कर देगी तथा वे अणु फोटॉन के अवशोषण के बिना ही अभिक्रिया करने में सक्षम होंगे।
(४) सक्रियित अणु अन्य अणुओं से टकराकर उन्हें ऊर्जा का स्थानांतरण कर सकते हैं, जिससे वे अणु भी सक्रियित हो सकते हैं।

निम्न क्वांटम दक्षता के निम्नलिखित कारण है--(१)उत्तेजित अणु उत्पाद बनने के पूर्व ही विसक्रियित हो जाते हैं।
(२) उत्तेजित अणु के अनुत्तेजित अणुओं से टकराने से उत्तेजित अणु की ऊर्जा कम हो जाती है।
(३) प्राथमिक प्रकाश रासायनिक प्रक्रम विपरीत दिशा में हो जाए।
(४) विघटित खण्ड पुनः संयोग करके मूल यौगिक बना दे।
उदाहरण-- हाइड्रोजन तथा ब्रोमीन का संयोग की क्वांटम दक्षता 0.01 (निम्न) होने का स्पष्टीकरण---
   इस अभिक्रिया की क्रियाविधि बोडेन्सटीन तथा लिंडे ने सन् 1925 में दिया। H2 तथा Br2 के प्रकाश रासायनिक संयोग के लिए 5,100A  से कम तरंगदैर्ध्य के विकिरण की आवश्यकता होती है। इस अभिक्रिया की क्वांटम दक्षता बहुत कम 0.01 होती है। ब्रोमीन अणु क्वांटम का अवशोषण कर ब्रोमीन परमाणुओं में अपघटित हो जाता है, इस अभिक्रिया की क्रियाविधि निम्नलिखित हैं--
(१) Br2 ➕ hu  ----------->  Br ➕ Br    (प्राथमिक प्रक्रम)

(२) H2 ➕ Br   ------------> HBr ➕ H  (द्वितीय प्रक्रम)

(३) Br2 ➕ H   ------------> HBr ➕ Br   (द्वितीय प्रक्रम)

(४) HBr ➕ H   ------------> H2 ➕ Br   (द्वितीय प्रक्रम)

(५) Br ➕ Br     ------------> Br2  (द्वितीय प्रक्रम)


अभिक्रिया (२) अत्याधिक ऊष्माशोषी है और साधारण ताप पर बहुत धीमी गति से होती है। अधिकांश ब्रोमीन परमाणु आपस में संयोगकर  ब्रोमीन अणु बना लेते हैं। अभिक्रिया (३), (४) तथा (५) जो प्रत्यक्ष या परोक्ष रूप से अभिक्रिया (२) पर निर्भर करती है, वे भी पूर्ण नहीं हो पातीं। इस कारण अभिक्रिया की क्वांटम दक्षता बहुत कम होती है।

इस लिंक पर जाए 👇👇👇
https://youtu.be/W7hFCDSK6d8

By Manjit sahu

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