फ्रैंक काॅणडान सिद्धांत:-
इस सिद्धांत के अनुसार इलेक्ट्रॉनिक संक्रमण निम्नतम कम्पन ऊर्जा से ही होता है, क्योंकि इन निम्नतम कंम्पन ऊर्जा स्तरों पर परमाणुओं का वेग (कम्पन ऊर्जा) शून्य होती है। इस कारण परमाणु इस स्थिति में सबसे ज्यादा समय बिताते हैं (चित्र के अनुसार aa' कम्पन ऊर्जा स्तर से इलेक्ट्रॉनिक संक्रमण होंगे) अणु को ऊर्जा देने पर नाभिकों के दोलन के पूर्व ही इलेक्ट्रॉनों का संक्रमण हो जाता है, चूंकि इलेक्ट्रॉनों का वेग नाभिकों के वेग से ज्यादा होता है, अतः नाभिकों के दोलन करके अंतरनाभिकीय दूरी को परिवर्तित करने से पहले ही इलेक्ट्रॉनों का संक्रमण हो जाता है। चित्र में aa' से c में होने वाला संक्रमण इसी सिद्धांत पर आधारित है, जिससे इलेक्ट्रॉन वक्र (A) के निम्निष्ठ से वक्र (B) के निम्निष्ठ में न जाकर aa' से c में पहुंच जाते हैं।
फ्रेंक कॉण्डान सिद्धांत के अनुसार इलेक्ट्रॉनिक संक्रमण की सर्वाधिक संभावना मूल इलेक्ट्रॉनिक अवस्था के मूल कम्पन ऊर्जा स्तर (v=0) के मध्य बिंदु से (न कि मूल कम्पन ऊर्जा के दोनों सिरों से) पहली उत्तेजित इलेक्ट्रॉनिक अवस्था के v=2 कम्पन ऊर्जा स्तर पर होती है। अतः v=0 से v=2 में होने वाला संक्रमण तीव्र बैण्ड उत्पन्न करेगा जबकि v=0 से v=3,4,5 पर संक्रमण की प्रायिकताएं इनकम होती है।
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https://youtu.be/AQ-s4dFH4Kc
By Manjit sahu

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