शुक्रवार, 29 मई 2020

(१)घूर्णन स्पेक्ट्रम पर समस्थानिक प्रभाव (२)घूर्णन स्पेक्ट्रम के लिए आवश्यक शर्तें

(c) घूर्णन स्पेक्ट्रम पर समस्थानिक प्रभाव(isotope effect on rotational spectrum) किसी तत्व के परमाणु जिनके परमाणु क्रमांक तो समान होते हैं किंतु उनके भार भिन्न-भिन्न होते हैं, उन्हें समस्थानिक कहते हैं। जब किसी अणु में किसी एक परमाणु को उसके समस्थानिक द्वारा प्रतिस्थापित किया जाता है तो बनने वाला नया अणु रासायनिक तौर पर तो पहले अणु के समान होता है, किंतु समस्थानिक से प्रतिस्थापन करने पर अणु का द्रव्यमान परिवर्तित हो जाता है जिससे अणु का जड़त्व आघूर्ण (I) में भी परिवर्तन होता है। चूंकि घूर्णन स्पेक्ट्रम में घूर्णन कारक 
होता है।

यदि प्रतिस्थापन करने वाले परमाणु का द्रव्यमान अधिक हो, तो इससे I का मान भी बढ़ेगा एवं B का मान कम हो जाएगा। चूंकि घूर्णन स्तर की ऊर्जा या तरंग संख्या B के मान के समानुपाती होती है।


अतः B का मान कम होने से घूर्णन स्पेक्ट्रम रेखाएं पास पास आ जाएगी। उदाहरणार्थ CO अणु में C12 परमाणु को उसके समस्थानिक C13 परमाणु से प्रतिस्थापित करने पर CO के घूर्णन स्पेक्ट्रम रेखाओं के बीच की दूरियां कम हो जाती है।

समस्थानिक प्रतिस्थापन के अनुप्रयोग(application of isotopic substitution)
समस्थानिक प्रतिस्थापन कर घूर्णन स्पेक्ट्रम की सहायता से समस्थानिक का परमाणु भार ज्ञात किया जा सकता है। एक तत्व जिसके दो समस्थानिकों का द्रव्यमान m1 एवं m2 है, जिनसे बने अणुओं का जड़त्व आघूर्ण I1 एवं I2 तथा घूर्णन इससे स्थिरांक व अपचयित द्रव्यमान क्रमशः

समस्थानिक प्रतिस्थापन से अणु के अंतरनाभिकीय दूरी में या अणु की बंध लंबाई में कोई ज्यादा अंतर नहीं आता है। 

इस तरह 
की सहायता से अज्ञात समस्थानिक का परमाणु द्रव्यमान ज्ञात किया जा सकता है।

(d)घूर्णन स्पेक्ट्रम के लिए आवश्यक शर्तें 
(१) घूर्णन स्पेक्ट्रम विद्युत चुंबकीय स्पेक्ट्रम के उस भाग से संबंध रखता है, जो 100 माइक्रोमीटर से 1 सेंटीमीटर के परास में है। अतः यह सुदूर अवरक्त और रेडियों आवृत्ति क्षेत्र के मध्य के क्षेत्र में बनता है। अतः घूर्णन स्पेक्ट्रम के लिए आवश्यक विद्युत चुंबकीय क्षेत्र की आवश्यकता है।
(२)घूर्णन स्पेक्ट्रम केवल उन्हीं अणुओं में सक्रिय हो पाता है। जिनमें स्थाई द्विध्रुव आघूर्ण होता है। जैसे H2O,CO,HCl,CHCl3 इत्यादि में जबकि H2,N2,O2,Cl2 शुद्ध घूर्णन स्पेक्ट्रम नहीं प्रदर्शित करते, क्योंकि इनमें स्थाई द्विध्रुव आघूर्ण नहीं है।

अनुप्रयोग (१) द्विपरमाणुवीय अणु के मध्य बंध की दूरी ज्ञात करने में-- घूर्णन करते हैं द्विपरमाणुक अणु की ऊर्जा

जहां, J का मान 0,1,2,3...... इत्यादि हो सकता है।
 J=घूर्णन क्वांटम संख्या, h= प्लांक स्थिरांक एवं  I= जड़त्व आघूर्ण है।
 समीकरण (1) को तरंग संख्या के रूप में परिवर्तित करने पर,

जहां घूर्णन नियतांक है
वरण सिद्धांत के अनुसार➖∆J=+-1 होता है। समीकरण (2) में J का मान रखने पर न्यूनतम ऊर्जा अंतर होगा।

m1 तथा m2 दो परमाणुओं के द्रव्यमान हैं तथा r उनके बीच की दूरी है, जिसे बंध लंबाई कहा जाता है।

समीकरण (6) से बंध की लंबाई ज्ञात की जा सकती है।


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By Manjit sahu

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