https://youtu.be/s6GQMxuP990
काॅम्पटन प्रभाव (Compton Effect):-
यदि किसी तरंगदैर्ध्य की कोई X- किरणें किसी हल्के तत्व से टकराती है तो प्रकीर्णित किरण का तरंगदैर्ध्य आपतित किरण के तरंगदैर्ध्य से अधिक हो जाता है। दूसरे शब्दों में कह सकते हैं कि प्रकीर्णित किरण की ऊर्जा आपतित किरण की अपेक्षा कम हो जाती है, इस प्रभाव को कॉम्पटन प्रभाव कहते हैं।
जब

ऊर्जा वाले X- किरणों का एक फोटो तत्व की सतह पर स्थित एक इलेक्ट्रॉन से टकराता है तो वह अपनी कुछ ऊर्जा इलेक्ट्रॉन को देकर स्वयं प्रकीर्णित हो जाता है ।
इस प्रक्रम में फोटाॅन की ऊर्जा कुछ कम हो जाती है जिससे प्रकीर्णित X- किरणों की
से कम हो जाती है। नई आवृत्ति का मान आपतित X- किरणों तथा प्रकीर्णित X- किरणों के बीच के 
पर निर्भर करता है।
का परिकलन करने के लिए निम्न व्यंजक दिया:-
को काॅम्पटन विस्थापन कहते हैं।m= इलेक्ट्रॉनों की संहति,c= प्रकाश का वेग।
ऊपर के समीकरणों से यह ज्ञात होता है कि काॅम्पटन विस्थापन
आपतित X-किरणों के तरंगदैर्ध्य तथा तत्व की प्रकृति से प्रभावित नहीं होता है। यह केवल प्रकीर्णन कोण पर निर्भर करता है।
प्रकीर्णन कोण 90 अंश 180 अंश के लिए कैप्टन विस्थापन के लिए आंकिक:-
https://youtu.be/s6GQMxuP990
जब

ऊर्जा वाले X- किरणों का एक फोटो तत्व की सतह पर स्थित एक इलेक्ट्रॉन से टकराता है तो वह अपनी कुछ ऊर्जा इलेक्ट्रॉन को देकर स्वयं प्रकीर्णित हो जाता है ।
इस प्रक्रम में फोटाॅन की ऊर्जा कुछ कम हो जाती है जिससे प्रकीर्णित X- किरणों की

पर निर्भर करता है।
काॅम्पटन ने तरंगदैर्ध्य में होने वाली वृद्धि
का परिकलन करने के लिए निम्न व्यंजक दिया:-
को काॅम्पटन विस्थापन कहते हैं।m= इलेक्ट्रॉनों की संहति,c= प्रकाश का वेग।
ऊपर के समीकरणों से यह ज्ञात होता है कि काॅम्पटन विस्थापन
आपतित X-किरणों के तरंगदैर्ध्य तथा तत्व की प्रकृति से प्रभावित नहीं होता है। यह केवल प्रकीर्णन कोण पर निर्भर करता है।
प्रकीर्णन कोण 90 अंश 180 अंश के लिए कैप्टन विस्थापन के लिए आंकिक:-
https://youtu.be/s6GQMxuP990






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