ग्रोथस ड्रेपर का नियम:-
इसके अनुसार केवल वही विकिरणें है प्रकाश रसायनिक अभिक्रिया के लिए उत्तरदाई है होते हैं जो क्रिया करने वाले अभिकारक ऑडियो द्वारा अवशोषित होती है यह एक गुणात्मक नियम है जो अवशोषित प्रकाश एवं क्रिया करने वाले ऑडियो के मध्य कोई मात्रात्मक संबंध नहीं दर्शाता है।
स्टार्क आइंस्टीन का प्रकाश रसायनिक तुल्यता का नियम:-
इस नियम के अनुसार, "प्राथमिक प्रकाश रासायनिक अभिक्रिया में भाग लेने वाला प्रत्येक अणु एक क्वांटम विकिरण का अवशोषण कर सक्रियित(activate) होता है।"
एक मोल पदार्थ द्वारा अवशोषित ऊर्जा को एक आइंस्टीन कहते हैं।
ऊपर के समीकरणों से स्पष्ट है कि विकिरण का तरंगदैर्ध्य जितना ही कम होगा, प्रति मोल अवशोषित ऊर्जा उतनी ही अधिक होगी।
क्योंकि
अतःस्पष्ट है कि प्रति ग्राम अणु अवशोषित ऊर्जा तरंगदैर्ध्य के व्युत्क्रमानुपाती होती है।
यदि स्टार्क आइंस्टीन नियम सत्य है तो प्रत्येक मोल पदार्थ
ऊर्जा अवशोषित करेगा, अर्थात 1 kcal ऊर्जा से
मोल पदार्थ का अपघटन होना चाहिए।
सत्यापन:-
अभिक्रिया प्रकाश रासायनिक तुल्यता का पालन कर रही है या नहीं यह जानने के लिए उस अभिक्रिया के लिए क्वांटम दक्षता का प्रायोगिक निर्धारण किया जाता है। यदि क्वांटम दक्षता का मान एक आता है तो अभिक्रिया इस नियम का पालन करती है।
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https://youtu.be/lHpzrs8J-IA
By Manjit sahu




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