श्याम वस्तु (black body) :- यह वह वस्तु है जो उस पर आपतित(incident) होने वाली सभी प्रकार के तरंगदैर्ध्य वाली विवरणों को पूर्णतः अवशोषित कर लेती है । यह वस्तुएं रंगीन अथवा रंगहीन विकिरणों को न तो परावर्तित और न ही पारगत(transmit) करती है, अतः ये वस्तुएं सदैव काली दिखाई पड़ती है । गर्म करने पर सभी वस्तुएं ऊर्जा विकरित करती है, किंतु श्याम वस्तुओं द्वारा विकरित ऊर्जा सर्वाधिक होती है । अतः श्याम वस्तुओं को पूर्ण विकिरक(complete radiator)कहा जाता है । यदि निश्चित ताप पर श्याम वस्तु द्वारा उत्सर्जित विकिरणों के तरंगदैर्ध्य को x- अक्ष पर तथा संगत ऊर्जा घनत्व (energy density)को y-अक्ष पर आरेखित किया जाए तो पार्श्व चित्र अनुसार वक्र प्राप्त होता है।
प्राप्त वक्र के निम्नलिखित अभिलक्षण होते है :-
1.श्याम वस्तु द्वारा किसी निश्चित ताप पर उत्सर्जित विकिरणों का ऊर्जा घनत्व एक निश्चित तरंगदैर्ध्य पर उच्चतम होता है । इसे चित्र में बिंदु A से दर्शाया गया है। बिंदु A का संगत तरंगदैर्ध्य श्याम वस्तु का उस निश्चित ताप पर अभिलक्षण(characteristic) है।
2.प्रत्येक ताप के लिए इस प्रकार के भिन्न-भिन्न वक्र प्राप्त होते हैं।
3.श्याम वस्तु द्वारा उत्सर्जित कुल ऊर्जा (ऊर्जा घनत्व) उस वस्तु के ताप के अनुसार भिन्न भिन्न होती है।
स्टीफन बोल्ट्जमैन नियम:- इसके अनुसाार "किसी ताप पर कृष्ण पिंड से उत्सर्जित होने वाली कुल ऊर्जा (E),कृष्ण पिंड के ताप(T) के चतुर्थघात (fourth power) के समानुपाती होती है।
4.उच्च तापों पर वक्र का उच्चतम(maximum) अधिक सुस्पष्ट प्राप्त होता है तथा ताप में वृद्धि के साथ उच्चतम की स्थिति कम तरंगदैर्ध्य की ओर हटती जाती है।
वीन का विस्थापन नियम:-
चित्रों में दर्शाए गए वक्र श्याम वस्तु विकिरण स्पेक्ट्रा या श्याम वस्तु विकिरण वक्र ( black body radiation curves) कहलाते हैं।
श्याम पिंड विकिरण को प्लॉन्क विकिरण नियम की सहायता से समझाया जा सकता है।
किरचाॅप का नियम :-
इसके अनुसार कृष्ण पिंड ऊष्मा विकिरणों के अच्छे अवशोषक एवं अच्छे उत्सर्जक होते हैं । कृष्ण पिंड निम्न ताप पर जिन विकिरणों का अवशोषण करते हैं उच्च ताप पर उन्हीं भी किरणों को उत्सर्जित भी कर देते हैं ।
किरचॉफ के नियम अनुसार दिए गए ताप पर किसी भी पिंड कि स्पेक्ट्रल उत्सर्जन क्षमता e लेम्डा एवं अवशोषण क्षमता a लेम्डा का अनुपात एवं स्थिरांक होता है जो कृष्ण पिंड के स्पेक्ट्रेल उत्सर्जन क्षमता E लेम्डा के तुल्य होता है।
अतः अच्छे और अवशोषक अच्छे उत्सर्जक एवं बुरे अवशोषक बुरे उत्सर्जक होते हैं।
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https://youtu.be/CiFtSAyn9t0
By Manjit




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