संयोजकता बंध विधि तथा आण्विक ऑर्बिटल विधि की तुलना:-
असमानताएं--
1.गणितीय दृष्टि से संयोजकता आण्विक ऑर्बिटल विधि से कठिन है।
2. MO एवं VB विधि से अधिक सही है।
3.VB-विधि में वे परमाणु जिनसे अणु बनता है, अणु बनने के बाद भी अपनी पृथक पहचान बनाए रखते है, किंतु MO- विधि में परमाणुओं के आर्बिटल एक ऐसा आण्विक ऑर्बिटल बनाते हैं जिससे मूल परमाणु अपनी पृथक पहचान नहीं रखते हैं।
4.VB-विधि में जिस परमाणु का इलेक्ट्रॉन होता है उसे उसी परमाणु का मानते हैं, किंतु MO- विधि में संयोग करने वाले परमाणु का इलेक्ट्रॉन किसी परमाणु का ना होकर संपूर्ण अणु का माना जाता है।
5.VB-विधि में परमाणुओं के केवल संयोजकता कोश परमाण्वीय आर्बिटल ही बंध में भाग लेते हैं। इन आर्बिटलों में विपरीत चक्रण वाले अयुग्मित इलेक्ट्रॉन होते हैं जो युग्मित होकर संयोजकता बंध बनाते हैं। MO- विधि में अर्ध पूरित या पूर्ण पूरित सभी परमाण्वीय आर्बिटल अतिव्यापन करके आण्विक आर्बिटल बनाते हैं।
6.VB-विधि से ऑक्सीजन के अनु चुंबकीय व्यवहार को नहीं समझाया जा सकता, किंतु MO-विधि इसे समझाने में सक्षम है।
7.VB-विधि में परमाणु आर्बिटलों से बने अणु में विपरीत चक्रण वाले इलेक्ट्रॉनों का युग्म दो नाभिकों के बीच स्थानीत रहता है, किंतु आण्विक ऑर्बिटल सिद्धांत में अतिव्यापन से बने आर्बिटल में इलेक्ट्रॉन युग्म विस्थानीत होता है।
8.VB-विधि में बंध लंबाई, बंध ऊर्जा आदि का परिकलन सरल है, किंतु MO-विधि में कठिन है।
समानताएं
1.दोनों विधियों में बंध बनाने वाले परमाणुओं के परमाण्विक आर्बिटलों का अतिव्यापन होता है।
2.दोनों विधियों में यह माना गया है कि अतिव्यापन में भाग लेने वाले आर्बिटलों की ऊर्जा लगभग समान होनी चाहिए।
3.दोनों विधियों में इलेक्ट्रॉनों के वितरण की विधि समान है।
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By Manjit

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