(a) शुद्ध घूर्णन स्पेक्ट्रम:-
घूर्णन स्पेक्ट्रम विद्युत चुंबकीय स्पेक्ट्रम के उस भाग से संबंध रखता है, जो 100 माइक्रोमीटर से 1 सेंटीमीटर के परास में हैं। अतः यह सुदूर अवरक्त और रेडियो आवृत्ति क्षेत्र के मध्य के क्षेत्र में बनता है। घूर्णन स्पेक्ट्रम केवल उन्हीं अणुओं द्वारा दिया जाता है जिनमें स्थाई द्विध्रुव आघूर्ण होता है। जैसे- H2O,CO,HCl,CHCl3, जबकि H2,N2,O2,Cl2 शुद्ध घूर्णन स्पेक्ट्रम प्रदर्शित नहीं करते, क्योंकि इनमें स्थाई द्विध्रुव आघूर्ण नहीं होता है।
(b) सभी माइक्रोवेव स्पेक्ट्रम (घूर्णन स्पेक्ट्रम) का अध्ययन गैसी अवस्था में किया जाता हैै, क्योंकि ठोस एवं द्रव अवस्था में अणु की घूर्णन ऊर्जा इन तरंगोंं से प्रभावित नहीं होती है।
घूर्णन करते हुए द्विपरमाण्विक अणु को एक दृढ़ घूर्णक माना जाता जा सकता है। किसी दृढ़ घूर्णक द्विपरमाण्विक अणु की ऊर्जा
जहां J=घूर्णन क्वांटम संख्या, I= जड़त्व आघूर्ण,h= प्लांक नियतांक
J का मान 0,1,2,3..... हो सकता है।
समीकरण (१) को तरंग संख्या के रूप में परिवर्तित करने पर,
वरण नियम(selection rule) केवल वे ही घूर्णन संक्रमण संभव है, जिसमें घूूूूर्णन क्वांटम संख्या में परिवर्तन इकाई हो। अर्थात्
जहां ➕1 विकिरण के अवशोषण को तथा➖1 विकिरण के उत्सर्जन को प्रदर्शित करता है। यदि किसी अणु को J ऊर्जा स्तर से(J➕1) ऊर्जा स्तर में लाया जाए तो
समीकरण (3) में J=0,1,2,3..... रखने पर न्यू बार के मान क्रमशः 2B,4B,6B,8B...... प्राप्त होंगे। अतः J के मान में क्रमिक वृद्धि करने से अवशोषण स्पेक्ट्रम में जो रेखाएं प्राप्त होती है, वे क्रमशः 2B,4B,6B,8B....../cm पर स्थित होती है। उसी प्रकार ऊर्जा में क्रमिक कमी करने पर वैसा ही उत्सर्जन स्पेक्ट्रम प्राप्त होगा। अतः घूर्णी स्पेक्ट्रम में रेखाओं के मध्य स्थित दूरी 2B /cm होती है।
m1 तथा m2 दो परमाणुओं के द्रव्यमान हैं और r उनके बीच की दूरी है, जिसे बंध लंबाई कहा जाता है।
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By Manjit sahu







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