शुद्ध घूर्णन रमन स्पेक्ट्रा अणु की घूर्णन ऊर्जा में होने वाले संक्रमण के द्वारा प्राप्त होता है इस समय अणु की कम्पन्न ऊर्जा में कोई परिवर्तन नहीं होता है। अतः शुद्ध घूर्णन स्पेक्ट्रा के लिए वरण नियम
∆J=0,+-2
यहां ∆J अणु की घूर्णन ऊर्जा में होने वाला परिवर्तन है।∆J=+-2 यह दर्शाता है। घूर्णन ऊर्जा के स्तर में दो स्तरों का परिवर्तन होना चाहिए। जबकि शुद्ध कम्पन रमन स्पेक्ट्रा के लिए वरण नियम (डेल न्यू) ∆u=+-1 एवं ∆J=0,+-2 होता है।
(c) कंपनी स्पेक्ट्रम के लिए वरण नियम (selection rule for vibrational spectra)
सरल आवर्ती दोलित्र या द्विपरमाणुक अणु के लिए समीकरण (3) के अनुसार कम्पन ऊर्जा स्तर संभव है किंतु कम्पन ऊर्जा स्तरों में संक्रमण निम्न वरण नियम का पालन करते हैं।
(डेल न्यू) ∆u=+-1
अर्थात् द्विपरमाणुक अणु में कंपन ऊर्जा में संक्रमण एक ऊर्जा स्तर या नीचे ही हो सकती है। इस तरह अणु(न्यू) u=0 से (न्यू) u=1 या u=1 से u=2 में ऊर्जा अवशोषण के दौरान संक्रमण कर सकता है। डेल न्यू(∆u=-1) जबकि ऊर्जा उत्सर्जन करने पर अणु एक ऊर्जा स्तर नीचे (∆u=-1) आ सकता है। प्रत्येक प्रकार का कंपन ऊर्जा संक्रमण एक बैंड उत्पन्न करता है।
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By Manjit sahu
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