रैले प्रकीर्णन एवं रमन प्रकीर्णन:-
जब एकवर्णी प्रकाश किसी पारदर्शी माध्यम से गुजरता है, तब प्रकाश का प्रकीर्णन होता है।
प्रकिर्णीत प्रकाश में आपतित विकिरणों के समान आवृत्ति वाली विकिरण के अलावा उच्च तथा निम्न आवृत्ति वाली विकिरणें प्राप्त होती है। प्रकीर्णन द्वारा आपतित प्रकाश की आवृत्ति में परिवर्तन होने की घटना को रमन प्रभाव कहते हैं जबकि प्रकीर्णन द्वारा समान आवृत्ति वाला विकिरण प्राप्त होने की घटना को रैले टिण्डल प्रभाव कहते हैं।
टिंडल प्रकीर्णन में प्रकीर्णित प्रकाश की आवृत्ति वही होती है, जो आपतित प्रकाश की होती है। इस प्रकीर्णन में फोटॉन और अणु में टक्कर प्रत्यास्थ होती है। प्रत्यास्थ टक्कर में अणु तथा फोटाॅन के बीच ऊर्जा का आदान प्रदान नहीं होता है। फोटॉन बिना किसी परिवर्तन के प्रकीर्णित हो जाता है।
रमन प्रकीर्णन में प्रकीर्णित प्रकाश की आवृत्ति आपतित प्रकाश की आवृत्ति से भिन्न होती है। यदि प्रकीर्णित प्रकाश की आवृत्ति आपतित प्रकाश की आवृत्ति से कम होती है, तो स्टोक्स रेखा मिलती है। यदि प्रकीर्णित प्रकाश की आवृत्ति आपतित प्रकाश की आवृत्ति से अधिक होती है, तो प्रतिस्टोक्स रेखा मिलती है।
रमन प्रभाव का स्पष्टीकरण:-
क्वांटम सिद्धांत के अनुसार, विद्युत चुंबकीय विकिरण ऊर्जा कणों से बने होते हैं, जिन्हें फोटाॅन कहते हैं। ये फोटॉन पदार्थ के अणुओं से टकराते हैं यदि यह टक्कर प्रत्यास्थ हों तो फोटॉन बिना ऊर्जा खोये प्रकीर्णित हो जाते हैं तथा आपतित किरणों की दिशा के समकोण में रखे संसूचक में सामान आवृत्ति की किरणों के रूप में प्राप्त होते हैं। दूसरे शब्दों में आपतित विकिरण की आवृत्ति (न्यू) तथा प्रकीर्णित विकिरण की आवृत्ति (न्यू) एक समान होती है।
यदि फोटॉन और पदार्थ के अणुओं के बीच की टक्कर अप्रत्यास्थ हो तो इनके मध्य उर्जा का आदान-प्रदान हो सकता है।
रमन आवृत्ति तथा रमन विस्थापन:-
रमन प्रभाव में आपतित प्रकाश एवं प्रकीर्णित प्रकाश की आवृत्तियों का अंतर रमन आवृत्ति या रमन विस्थापन कहलाता है। यदि आपतित प्रकाश की आवृत्ति न्यू आई हो तो रमन आवृत्ति न्यू आर का मान न्यू आर इक्वल न्यू आई माइनस न्यू एस या डेल न्यू इक्वल न्यू आई माइनस न्यू एस जहां न्यू आर रमन आवृत्ति एवं न्यू एस रमन विस्थापन है।
रमन आवृत्ति का मान प्रकीर्णित करने वाले पदार्थ के लिए अभिलाक्षणिक होता है। यह आपतित प्रकाश की तीव्रता पर निर्भर नहीं करता है।
यदि टकराने से अणु फोटॉन से ∆E ऊर्जा प्राप्त करता है तो प्रकीर्णित फोटॉन की ऊर्जा (hu➖∆E) होगी तथा प्रकीर्णित विकिरण की आवृत्ति (u➖∆E/h) होगी जो आपतित विकिरण की आवृत्ति से कम होगी।
(१)यदि प्रकीर्णन से मूल आवृत्ति से कम आवृत्ति की रेखाएं प्राप्त होती है, तो उन्हें स्टोक्स रेखाएं कहते हैं।
(२)यदि प्रकीर्णन से मूल आवृत्ति से अधिक आवृत्ति की रेखाएं प्राप्त होती है, तो उन्हें प्रति स्टॉक्स रेखाएं कहते हैं।
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By Manjit sahu
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