मंगलवार, 19 मई 2020

श्रोडिंजर समीकरण की उपयोगिता



श्रोडिंजर समीकरण तरंग यांत्रिकी का आधार है। श्रोडिंजर समीकरण का उपयोग इलेक्ट्रान, परमाणु, अणु आदि कणों से संबंधित अनेक समस्याओं का हल निकालने के लिए होता है।

श्रोडिंजर तरंग समीकरण एक द्विघात अवकलन समीकरण है। इसके अनेक हल है जिनमें से बहुत से हल निरर्थक व काल्पनिक है। संपूर्ण ऊर्जा E के कुछ निश्चित मानों के लिए ही फलन तरंग फलन के संतोषजनक हल होते हैं। यह निश्चित मान आइगेन मान कहलाते हैं। किसी भी परमाणु में ये आइगेन मान (ऊर्जा के निश्चित मान) बोर द्वारा प्रस्तावित विभिन्न ऊर्जा स्तरों के ऊर्जा मानों के लगभग समतुल्य है। ऊर्जा के इन मानों के संगत तरंग फलन के मानों को श्रोडिंजर समीकरण के तरंग फलन अथवा आइगेन फलन कहते हैं। किसी भी तंत्र के समस्त गुण उसके तरंग फलन के परिकलन से परिकलित किए जा सकते हैं।
श्रोडिंगर समीकरण में तरंग फलन (साइ) इलेक्ट्रॉन तरंग का आयाम दर्शाता है। त्रिविम आकाश में किसी निश्चित बिंदु पर इलेक्ट्रान (कण)के पाए जाने की प्रायिकता तरंग फलन के वर्ग के समानुपाती होती है। यह प्रायिकता कभी भी तरंग फलन के समानुपाती नहीं हो सकती क्योंकि आकाश में कभी-कभी तरंग फलन का मान ऋणात्मक भी हो सकता है, किंतु प्रायिकता का मान कभी भी ऋणात्मक नहीं होता। प्रायिकता सदैव धनात्मक या शून्य होती है। इलेक्ट्रान जैसे कण के लिए x तथा x➕dx के बीच पाए जाने की संभावना तरंग फलन वर्ग या आयाम फलन वर्ग द्वारा प्रदर्शित होती है। अतः तरंग फलन वर्ग नाभिक के चारो ओर किसी दिए हुए क्षेत्र में E ऊर्जा वाले इलेक्ट्रॉन के पाए जाने की संभावना बताता है। प्रायिकता का मान सदैव एक होता है क्योंकि x तथा x➕dx परास या आयतन dV में इलेक्ट्रॉन कहीं ना कहीं अवश्य पाया जाएगा।
 अतः प्रायिकता प्रायिकता,

इस प्रकार नाभिक के चारों ओर उन स्थानों का पता लगाया जा सकता है जहां विशिष्ट ऊर्जा E वाले इलेक्ट्रॉन के पाये जाने की संभावनाएं अधिक है। नाभिक के आसपास के क्षेत्र में इलेक्ट्रॉन के पाये जाने की प्रायिकता सर्वाधिक है। यदि नाभिक के चारों ओर स्थित त्रिविम आकाश का वह क्षेत्र जहां किसी विशिष्ट ऊर्जा वाले इलेक्ट्रॉन में के पाए जाने की प्रायिकता सर्वाधिक है, परमाण्वीय आर्बिटल कहलाता है।

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https://youtu.be/Jq2bbbCbkSA

By Manjit

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