सिग्मा एवं पाई आण्विक कक्षको में अंतर
सिग्मा आणविक कक्षक:-
(१) ये परमाण्विक कक्षकों के अक्षीय समाक्ष अतिव्यापन से बनते हैं। जैसे s-s,s-p या pz-pz कक्षकों के अतिव्यापन से सिग्मा आण्विक कक्षक बनते हैं।
(२) इनके बनने में अतिव्यापन की मात्रा ज्यादा होती है।
(३)सिग्मा आण्विक कक्षको के अंतरनाभिकीय अक्ष पर इलेक्ट्रॉन का आवेश घनत्व सममित होता है।
(४)अणु को अंतरनाभिकीय अक्ष पर घूर्णन कराने से अणु असममित रहता है।
(५)सिग्मा आण्विक कक्षकों की ऊर्जा पाई से कम होती है, अतः इनके इलेक्ट्रान जाने पर या सिग्मा बंध बनने से अणु का स्थायित्व बढ़ता है।
पाई आणविक कक्षक:-
(१) यह परमाण्विक कक्षकों के पार्श्वीय अतिव्यापन से बनते हैं। जैसे px-px और py-py परमाण्विक कक्षकों के अतिव्यापन से पाई आण्विक कक्षक बनेंगे ।
(२)इनके बनने में अतिव्यापन की मात्रा कम होती है।
(३)इनके अंतरनाभिकीय अक्ष पर इलेक्ट्रॉन का आवेश घनत्व असममित होता है।
(४)अणु का अंतरनाभिकीय अक्ष पर घूर्णन असममित होता हैं।
(५)पाई आण्विक कक्षकों की ऊर्जा ज्यादा होने के कारण इनमें इलेक्ट्रान जाने पर या पाई बंध का निर्माण अणु को सिग्मा बंध से कम स्थायित्व देता है।
इस लिंक पर जाए👇👇👇
https://youtu.be/QXQitpyZz14
By Manjit sahu
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