गुरुवार, 14 मई 2020

(a)प्लांक का विकिरण नियम (b) प्रकाश की द्वैत प्रकृति


प्लांक का विकिरण नियम(planck's radiation law):- श्याम वस्तुओं से उत्सर्जित विकिरणों के स्पेक्ट्रा को समझाने के लिए एम. प्लांक ने सन् 1900 में प्लांंक विकिरण नियम प्रस्तुत किया । सन् 1905 में आइंस्टीन ने सभी प्रकार के विकिरणों के लिए इस नियम को लागू करने का सुझाव दिया । प्लांक विकिरण नियम से --
1.श्याम वस्तु द्वारा ऊर्जा या विकिरणों का उत्सर्जन या अवशोषण ऊर्जा के निश्चित परिमाण वाले सूक्ष्म पैकेटों या बण्डलों के रूप में असतत् होता है । यह पैकेट क्वांटम कहलाते हैं । एक क्वांटम को एक फोटाॅन भी कहते हैं।

2.प्रत्येक क्वांटम के में निश्चित परिमाण की ऊर्जा होती है, जो विकिरण की आवृत्ति के समानुपाती होती है।

3. श्याम वस्तु की ऊर्जा क्वांटीक्रीत होती है अर्थात् ऊर्जा का उत्सर्जन या अवशोषण एक क्वांटम अथवा उसके पूर्णांक गुणित 
में ही हो सकता है।
  श्याम वस्तुओं द्वारा उत्सर्जित तथा अवशोषित विकिरण की आवृत्ति तथा ऊर्जा में संबंध दर्शाते हुए प्लांक ने निम्नलिखित व्यंजक व्युत्पन्न ने किया जो प्रायोगिक परिणामों को स्पष्ट करता है।

यह व्यंजक प्लांक विकिरण नियम कहलाता है।

(b)प्रकाश की द्वैत प्रकृति:- प्रकाश जो कि विद्युत चुंबकीय विकिरणों का बना होता है, उसकी प्रकृति कण (particle) व (wave)तरंग दोनों के समान होती है । प्रकाश के कुछ गुण जैसे विवर्तन, व्यतिकरण एवं ध्रुवण को तरंग सिद्धांत के द्वारा समझाया जा सकता है, जबकि कुछ गुण जैसेे- प्रकाश विद्युत प्रभाव, काॅम्पटन प्रभाव एवं कृष्ण पिंड विकिरण को केवल कणिका सिद्धांत के द्वारा समझाया जा सकता है। अतः प्रकाश की प्रकृति दोहरी होती है।
 प्रकाश की इसी दोहरी प्रकृति के आधार पर सन् 1924 में लुइस डी ब्रोग्ली ने यह परिकल्पना दी कि "पदार्थों में भी प्रकाश के समान द्वैत प्रकृति होती है अर्थात प्रत्येक द्रव्य कण में तरंग जैसे गुण पाए जाते हैं । डी ब्रोग्ली के अनुसार गति करते हुए छोटे-छोटे सूक्ष्म कण जैसे- इलेक्ट्रॉन, प्रोटॉन, परमाणु, अणु इत्यादि में कणों के साथ-साथ एक तरंग भी संबंद्ध रहता है। जिसे द्रव्य तरंग या डी ब्रोग्ली तरंगदैर्ध्य कहते हैं।"
विद्युत चुंबकीय तरंगों एवं द्रव्य तरंगों में अंतर:-
विद्युत चुंबकीय तरंगे:-
1. यह तरंगे विद्युत एवं चुंबकीय क्षेत्रों से संबंद्ध होते हैं।
2.इसका वेग प्रकाश के वेग 3×10 की घात 8 मीटर/ सेकंड के तुल्य होता है।
3. यह निर्वात में भी गमन कर सकती है।
द्रव्य तरंगे:- 
1.इनसे विद्युत एवं चुंबकीय क्षेत्र संबंद्ध नहीं होते हैं।
2. इसका वेद प्रकाश के वेग से हमेशा कम होता है जिस के विभिन्न मान हो सकते हैं।
3. यह निर्वात में गमन नहीं कर सकती है।
लिंक पर जाए, 👇👇
https://youtu.be/JSx8jjXDtbc

By Manjit

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