विद्युत चुंबकीय विकिरण:-
किसी पदार्थ से उत्सर्जित होने वाली प्रकाश एवं ऊष्मा तरंगें विद्युत चुंबकीय विकिरणें होती है, इनकी द्वैत् प्रकृति होती है। यह कणिका तथा तरंग दोनों की तरह व्यवहार करती है। विद्युत चुंबकीय तरंगों के गमन के लिए माध्यम की आवश्यकता होती है, अतः इनका वेग माध्यम पर निर्भर नहीं करता अर्थात् निश्चित होता है। ये तरंगे प्रकाश के वेग {c=2.998×10 power of 8 m/s ~ 3×10 power of 8 m/s) से गति करती है। इन तरंगों के साथ विद्युतीय एवं चुंबकीय क्षेत्र संबद्ध होते हैं, जो एक दूसरे के तथा विकिरण के संचरण की दिशा में लंबवत् होती है।
विद्युत चुंबकीय विकिरणों को उनके तरंगदैर्ध्य के आधार पर रेडियो तरंगों से कॉस्मिक किरणों तक विभाजित किया जा सकता है। तरंगदैर्ध्य के घटते क्रम के आधार पर विभाजित
किए गए स्पेक्ट्रम क्षेत्र की ऊर्जा, तरंगदैर्ध्य घटने के साथ-साथ बढ़ती जाती है। भिन्न-भिन्न ऊर्जा वाली विद्युत चुंबकीय तरंगों का पदार्थ के साथ पारस्परिक क्रिया से अलग-अलग प्रकार के स्पेक्ट्रम उत्पन्न होते हैं जिन्हें सारणी में दर्शाया गया है।
तरंगदैर्ध्य (लेमडा):-
किसी तरंग द्वारा एक पूर्ण चक्र में तय की गई दूरी तरंगदैर्ध्य कहलाती है। यह दो निकटतम शिखरों अथवा गर्त के मध्य की दूरी होती हैं, जिसे लेेमडा से दर्शातेे हैं।
आवृत्ति (न्यू):- किसी बिंदु से 1 सेकंड में गुजरने वाली तरंगों की संख्या को आवृत्ति कहते हैं, इसे चक्र प्रति सेकंड या हर्ट्ज से व्यक्त किया जाता है
तरंग संख्या (न्यू बार):- किसी विकिरण के तरंग दैर्ध्य के व्युत्क्रम को तरंग संख्या कहते हैं इसे न्यू बार द्वारा व्यक्त किया जाता है।
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https://youtu.be/s1Dh8pyl_kg
By Manjit sahu







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